तिब्बती कालोनी तथा मजनूं का टीला कॉलोनियों के लोगों को भी मालिकाना हक
एन सी आर, क्षेत्रीय, ताजा खबरें 6:03 am
दिल्ली सरकार राजधानी की 44 पुनर्वास कालोनियों के लोगों को मालिकाना हक देने के साथ-साथ तिब्बती कालोनी तथा मजनूं का टीला कॉलोनियों के लोगों को भी मालिकाना हक देने की तैयारी कर रही है जबकि यह कालोनियां पुनर्वास कालोनियां नहीं हैं.
सरकार ने इन कालोनियों को मालिकाना हक देने के लिए शहरी विकास विभाग सचिव की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय कमेटी गठित की है जिसकी रिपोर्ट के आधार पर इन कालोनियों से बदले में वसूल किये जाने वाले शुल्क का निर्धारण किया जाएगा. इन कालोनियों के लोगों को मालिकाना हक मिलने से 20 लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचेगा.
शहरी विकास मंत्री राजकुमार चौहान ने बताया कि राजधानी की 44 पुनर्वास कालोनियों के लोगों को मालिकाना हक देने के लिए सरकार गंभीर है. उन्होंने बताया कि अभी तक इन कालोनियों के लोगों से मात्र छह रुपए लाइसेंस शुल्क वसूल किया जा रहा था जिस पर सरकार ने रोक लगा दी है और सरकार ने इन कालोनियों के लोगों को उनके मकानों का मालिकाना हक देने का फैसला किया है.
उन्होंने बताया कि इसकी प्रक्रिया सरकार ने शुरूकर दी है और शहरी विकास विभाग के सचिव आरके श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. उन्होंने बताया कि इस कमेटी में श्रीवास्तव के अलावा शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा निदेाक सम्पति एवं शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव को ाामिल किया गया है.
चौहान ने बताया कि इनके अलावा मजनंू का टीला तथा इसके आस पास बसी अरुणा नगर आदि कालोनियांें एवं तिब्बती कालोनी के लोगों के भी उनके मकानों का मालिकाना हक देने पर सरकार विचार कर रही है और चार सदस्यीय कमेटी इन कालोनियों के बारे में भी विचार करेगी. उन्होंने बताया कि यह कमेटी पुनर्वास कालोनियों सहित उक्त सभी कालोनियों के लोगों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया तय करेगी तथा लोगों को मालिकाना हक के बदले उनसे लिए जाने वाले शुल्क भी तय करेगी.
गौरतलब है कि राजधानी में मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, खानपुर, सीमापुरी, त्रिलोकपुरी, सीलमपुर आदि क्षेत्रों में लगभग 44 पुनर्वास कालोनियां हैं जिन्हें स्लम विभाग द्वारा बसाया गया था, इन कालोनियों में लगभग 20 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं जो लंबे समय से मकानों के मालिकाना हक की मांग करते रहे हैं. इन्हें मालिकाना हक मिलने से वह लोग अपनी सम्पत्तियों की खरीद-फरोख्त कर सकेंगे.