ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और किसानों के बीच समझौता
उत्तर प्रदेश, एन सी आर, क्षेत्रीय, ताजा खबरें 4:18 am
इनमें पतवाड़ी, सादुल्लापुर, मिलक-लक्षी और बिसरख गांव के किसान शामिल हैं.
यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह, स्थानीय सांसद सुरेंद्र नागर की उपस्थिति में यह समझौता हुआ है.
सूत्रों का कहना है कि अकेले पतवाड़ी गांव में ही 17 बिल्डरों के प्रोजेक्ट हैं.
किसान नेताओं का दावा है कि 550 रुपए प्रति वर्ग मीटर मुआवज़ा बढ़ाने पर बात बन गई है. सूत्रों ने बताया कि अथॉरिटी ने किसानों की बाकी बातें भी मान ली हैं.
मालूम हो कि इस ज़मीन के लिए अथॉरिटी ने 850 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से किसानों को मुआवज़ा दिया था. अब अगर यह समझौता फाइनल हो जाता है तो किसानों को मिलने वाला मुआवज़ा बढ़कर 1400 रुपए प्रति वर्ग मीटर हो जाएगा.
गौरतलब है कि पतवाड़ी गांव में कई बिल्डरों ने अपनी आवासीय परियोजनाएं शुरू की थीं और कई लोग इनमें बुकिंग भी करा चुके हैं.
इनमें से कुछ परियोजनाओं का काम शुरू हो चुका है और कुछ शुरुआती दौर में ही हैं. 2008 में प्राधिकरण ने पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर डेवलपरों को बेच दी थी.
पतवाड़ी और देवली की अधिग्रहीत जमीन पर मैसर्स अरिहंत कंस्ट्रक्शन, सुंदरम, निराला एस्टेट्स, पटेल टाउन और आम्रपाली जैसे कई बिल्डरों की आवासीय परियोजनाएं चल रही हैं.
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, 'भूमि अधिग्रहण आवासीय परियोजनाओं के लिए था, इसमें आपातकालीन स्थिति जैसी कोई बात नहीं थी. ऐसे में इस अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले पक्ष की सुनवाई किए बिना अधिग्रहण करने का कोई तुक नहीं बनता.
उनकी सुनवाई के बाद उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए था.
उच्च न्यायालय ने यह आदेश इन दोनों गांवों के करीब 100 किसानों की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया. किसानों ने प्राधिकरण को अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें आपत्ति जताने का मौका और उचित मुआवजा दिए बिना यह अधिग्रहण किया गया.
इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने 6 जुलाई को शाहबेरी गांव में हुए 156 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण को रद्द करने का आदेश दिया था.
उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले में प्राधिकरण जनहित के नाम पर निजी बिल्डरों की मदद कर रहा था.
उच्चतम न्यायालय ने अधिग्रहण रद्द करते हुए किसानों को जमीन लौटाने और परियोजनाओं के ग्राहकों की रकम भी वापस करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा था.