बाईचुंग भूटिया ने अंतरराष्ट्रीय फुटबाल कैरियर को अलविदा कहा

पूर्व भारतीय कप्तान और स्टार स्ट्राइकर बाईचुंग भूटिया ने अंतरराष्ट्रीय फुटबाल कैरियर को अलविदा कह दिया.

पिछले सात-आठ महीने से चोटों का सामना कर रहे भूटिया ने अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ के फुटबाल हाउस में प्रेस कांफ्रेंस में संन्यास की घोषणा करते हुए कहा, 'मैं भारतीय टीम के साथ 16 साल के अंतरराष्ट्रीय कैरियर से खुश हूं. मैं देश के प्रतिनिधित्व के दौरान अपने योगदान से काफी प्रसन्न हूं.’

34 वर्षीय करिश्माई स्ट्राइकर ने भारत के अगले महीने होने वाले इंग्लैंड के अंडर 23 दौरे से नाम वापस ले लिया था जिसमें उन्हें पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ खेलना था. इसके बाद ही उनके संन्यास की अटकलें तेज हो गयी थी.

नाटे कद का यह फुटबालर खेलते हुए अपने कैरियर का अंत करना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया, जिससे वह काफी निराश है.

भूटिया ने कहा, 'जब मुझे इंग्लैंड दौरे के लिये टीम में शामिल किया गया तो मैं इसमें खेलना चाहता था लेकिन फिटनेस के कारण ऐसा नहीं हो पाया. मैंने सोचा था कि एक महीने के ब्रेक के बाद शायद खेल पाऊंगा. मैं खेलते हुए अपना अंतरराष्ट्रीय कैरियर समाप्त करना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं हो सका, जिससे मैं काफी निराश हूं. लेकिन मैं अपने कैरियर से खुश हूं जिसमें उतार चढ़ाव के कई दौर से गुजरा हूं.’

भूटिया अब अपने क्लब यूनाईटेड सिक्किम और अपने फुटबाल स्कूल प्रीमियर इंडिया फुटबाल स्कूल को अपना पूरा समय देना चाहते हैं.

चोटों से जूझ रहे भूटिया जनवरी में कतर के खिलाफ प्रतिष्ठित एशिया कप टूर्नामेंट में केवल 15 मिनट के लिये मैदान पर उतरे थे जिसमें भारतीय टीम 27 साल बाद खेलने उतरी थी.

भूटिया ने अपने कैरियर के शानदार क्षणों के बारे में बताते हुए कहा, '2008 में एएफसी चैलेंज कप में जीत दर्ज करना और एशियाई कप के लिये क्वालीफाई करना मेरे कैरियर के सर्वश्रेष्ठ क्षण में शामिल है. मैंने इस टूर्नामेंट में खेलने के बाद संन्यास लेने के बारे में सोचा था.’ उन्होंने कहा, 'लेकिन मैं एशियाई कप में केवल 15 मिनट के लिये खेल सका, इसलिये मैंने तब संन्यास नहीं लेने का फैसला किया क्योंकि मैं खेलते हुए कैरियर का अंत करना चाहता था. पिछले सात आठ महीने मेरे लिये काफी हताशापूर्ण रहे क्योंकि इस दौरान मैं चोटों से जूझता रहा इसलिये अब मैंने यह फैसला किया.’

भूटिया ने भारतीय टीम के साथ हर क्षण का लुत्फ उठाया लेकिन वह मानते हैं कि पिछले तीन चार वर्ष उनके कैरियर के सबसे शानदार रहे हैं. इस दौरान भारतीय टीम ने तीन अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में जीत दर्ज की.

भूटिया का हालांकि भारतीय टीम के साथ फुटबाल विश्वकप में खेलने का सपना पूरा नहीं हो सका. भारत की ओर से 107 अंतरराष्ट्रीय मैच में इस खिलाड़ी ने 42 गोल किये हैं.

इंग्लैंड में विदेशी क्लब एफसी बरी में खेलने वाले पहले भारतीय स्ट्राइकर ने कहा, 'विश्वकप खेलना मेरा सपना था, यह सच नहीं हो सका क्योंकि भारतीय टीम कभी विश्व कप नहीं खेल पायी. लेकिन अब उम्मीद करता हूं कि टीम शिखर पर पहुंचे और भविष्य में विश्वकप में खेले.’ उन्हें 2014 विश्वकप क्वालीफायर के लिये भारतीय टीम में भी नहीं चुना गया था. वह अपने क्लब यूनाईटेड सिक्किम एएफसी के साथ खेलना जारी रखेंगे.

भूटिया ने कहा, 'मैं क्लब के साथ जुड़ा रहूंगा और खेलना जारी रखूंगा. आप हमेशा पूरी जिंदगी खेलते रहना चाहते हैं लेकिन ऐसा नहीं हो सकता. मैं अपना समय अपने स्कूल को भी दूंगा.’

अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ से जुड़ने के संबंध में उन्होंने कहा, 'नहीं अभी फिलहाल कोई योजना नहीं है. लेकिन जब भी एआईएफएफ को मेरी जरूरत होगी मैं हमेशा तैयार रहूंगा.’

भूटिया ने कहा, 'एआईएफएफ की अंडर 16, अंडर 13 और जमीनीं स्तर पर कई योजनायें हैं, जिसमें कभी भी मेरी जरूरत होगी मैं मदद के लिये तैयार रहूंगा.’ उन्होंने कहा, 'मैं यूनाईटेड सिक्किम क्लब के साथ तकनीकी और खिलाड़ी के रूप में जुड़ा रहूंगा. मैं खिलाड़ियों के चयन से संबंधित सलाह, योजना और फैसलों में शामिल हूं. अभी सिर्फ इसे छह महीने ही हुए हैं और चोटों के कारण इसकी ओर से नहीं खेल पाया हूं. लेकिन फिटनेस हासिल करने के बाद खेलूंगा. मैं अपने क्लब को भारत के शीर्ष क्लबों में शामिल करना चाहता हूं.’

भूटिया से जब अपने 16 वर्ष के कैरियर के दौरान कोचों के साथ अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मैंने अपने हर कोच के साथ अलग-अलग चीजें सीखीं हैं. बाब हाटन के साथ हमने तीन बड़े टूर्नामेंटों में जीत दर्ज की.

उज्बेकिस्तान के अखरामोव ने मेरे कैरियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो मुझे मिडफील्ड से स्ट्राइकर की पोजीशन में लेकर आये. कुछ कोचों के साथ मतभेद भी रहे लेकिन ऐसा होता रहता है.’

भारतीय टीम के बारे में उन्होंने कहा, 'टीम में कई बेहतरीन युवा प्रतिभायें हैं, जिसमें सुनील छेत्री और जेजे लालपेखलुवा शामिल हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले दिनों में टीम में कई सुपर स्टार होंगे जो भारत को नयी ऊंचाईयों पर ले जायेंगे.’

एआईएफएफ के महासचिव कुशाल दास ने इस मौके पर उन्हें चांदी की प्लेट और शाल दी.

Posted by राजबीर सिंह at 1:39 am.
 

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