अन्ना को अनशन से उठाना हमारा संवैधानिक ‘हक’ हैः चिदंबरम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अन्ना हजारे से फिर बातचीत का इशारा किया है। सरकार का कहना है कि इस बातचीत का फैसला अन्ना हजारे पर निर्भर करता है लेकिन दूसरी तरफ सरकार ने ये भी दिखाने की कोशिश की है कि वो इस अनशन को लेकर अपना रुख सख्त कर सकती है।



गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि संसद में लोकपाल बिल पेश होने के बाद अन्ना का अनशन पूरी तरह गैरवाजिब है।

पी चिदंबरम ने कहा कि अन्ना का आंदोलन लोकतंत्र को चुनौती है। या तो आप लोकतंत्र और उसकी प्रक्रिया को स्वीकार करें अथवा आप लोकतंत्र को अस्वीकार कर दें और कहें कि 'यह मेरा तरीका है।'

केंद्र सरकार ने दबे छुपे शब्दों में ये भी इशारा दे दिया कि वो अन्ना को अनशन से जबरन उठा सकती है। चिदंबरम ने कहा कि अगर किसी की जान पर खतरा हो तो उसकी जान बचाना सरकार का कर्तव्य ही नहीं हक भी है। बीजेपी ने सरकार की इस दादागिरी को देश के संघीय ढांचे पर हमला करार दिया है।

दरअसल अन्ना को अनशन से रोकने की सरकार की लगभग हर चाल नाकाम हो चुकी है। वो जानती है कि अन्ना अगर एक बार अनशन पर बैठे तो फिर बाबा रामदेव की तरह लाठी के ज़ोर से उन्हें उठाना मुमकिन नहीं होगा। फिलहाल सरकार ये दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसने अन्ना से बातचीत के हर दरवाजे खोल रखे हैं। लेकिन अन्ना हैं कि मानते नहीं।

सरकार को ये इल्म है कि अन्ना के आंदोलन की सुगबुगाहट शहरों और सड़कों तक ही नहीं गांवों और गलियों तक है। यानी सख्ती महंगी पड़ सकती है। ऐसे में सरकार पहले तेल देखेगी, फिर तेल की धार देखेगी और उसके बाद ही कोई आखिरी फैसला लेगी।

Posted by राजबीर सिंह at 1:21 am.
 

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