तिहाड़ जेल से रिहा होने अन्ना हजारे और साथी
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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को उनके सहयोगियों के साथ तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया जाएगा. हालांकि अन्ना हजारे ने रिहा होने से साफ इंकार कर दिया.
दिल्ली पुलिस ने अन्ना पर लगे आरोपों को वापस लेने का फैसला किया है.
दिल्ली पुलिस कमिश्नर इसी मामले में तिहाड़ जेल पहुंच चुके हैं.
सूत्रों के मुताबिक अन्ना को जेल में उनकी बैरक से निकाल कर डीजी कार्यालय में शिफ्ट किया गया है.
दिल्ली पुलिस ने रिहाई का वारंट भेज दिया है और अब तिहाड़ जेल प्रशासन को फैसला करना है कि वह अन्ना हजारे व उनके साथियों को कब रिहा करेंगे.
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने बताया, "हमने अन्ना हजारे व उनके सहयोगियों की रिहाई का वारंट भेज दिया है."
भगत ने कहा कि अब यह तिहाड़ जेल प्रशासन को फैसला करना है कि वह अन्ना हजारे को कब रिहा करेंगे.
सरकारी लोकपाल विधेयक खारिज करने और जन लोकपाल विधेयक लाने की मांग को लेकर जयप्रकाश नारायण पार्क में धारा 144 लागू होने के बावजूद अनशन आरम्भ करने निकले अन्ना हजारे व उनके सहयोगियों को मंगलवार सुबह शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था.
बाद में निजी मुचलका देने और जमानत लेने से इंकार करने पर उन्हें सात दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में लेकर तिहाड़ जेल भेज दिया गया था.
खबर आ रही है कि अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में छत्रसाल स्टेडियम में एकत्रित जनसमूह ने भी रिहा होने से इंकार कर दिया है.
कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद अन्ना ने तिहाड़ जेल से सीधे जेपी पार्क में जाने की मांग की होगी. इसपर सरकार के मुकरने पर ही अन्ना ने रिहाई से इंकार किया होगा.
खबर आ रही है कि अन्ना के साथ तिहाड़ में बंद मनीष सिसोदिया जेल से बाहर आकर अन्ना की मांग को बताया.
सिसोदिया ने बताया कि अन्ना मांग कर रहे हैं कि या तो उनको सीधे जेपी पार्क जाने दिया जाय या फिर उनको रिहा ही ना किया जाय.
सिसोदिया ने यह भी बताया कि अन्ना का अनशन अभी जारी है और वह खुद बाहर आकर अनशन पर बैठ जाएंगे.
खबर यह भी है कि अन्ना को जेल से सीधे पुणे ले जाने के लिए एक स्पेशनल विमान तैयार है.
अन्ना की गिरफ्तारी की चौतरफा निंदा
अन्ना की गिरफ्तारी की बुधवार को चौतरफा निंदा हुई. इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करने वालों में राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक व आर्थिक संगठनों के सदस्य भी आगे रहे. ऐसे में बॉलीवुड कैसे पीछे रह सकता है. बॉलीवुड ने एक सुर में अन्ना हजारे की गिरफ्तारी का विरोध किया.
अन्ना हजारे की गिरफ्तारी के विरोध में सभी विपक्षी दल आश्चर्यजनक रूप से साथ खड़े नजर आए. इन दलों ने एक सुर में सरकार पर आरोप लगाया कि अन्ना हजारे को हिरासत में लेकर वह न सिर्फ नागरिक अधिकारों का हनन कर रही है बल्कि देश में 'आपातकाल जैसे हालात' पैदा कर रही है. भाजपा और वामपंथी दलों ने अन्ना के समर्थन में बुधवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है. हालांकि सत्ताधारी दल और सरकार के नुमाइंदे अन्ना पर हुई कार्रवाई का बचाव करते रहे.
लालकृष्ण आडवाणी : भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने और अपने दायित्वों का निर्वाह करने की बजाए यह सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को बलि का बकरा बना रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबा रही है.
सुषमा स्वराज : सरकार संसद में विपक्ष की आवाज दबाकर और अन्ना हजारे और उनके समर्थकों को हिरासत में लेकर आपातकाल जैसे हालात पैदा कर रही है. सरकारी मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और जब कोई इसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है तो उसकी आवाज को दबा दिया जाता है. यह सरकार आपातकाल की राह पर जा रही है.
बृंदा करात : अन्ना हजारे की गिरफ्तारी को हम लोकतंत्र पर हमले के रूप में देखते हैं. केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों का इसलिए दमन कर रही है क्योंकि वह खुद भ्रष्टाचार में लिप्त है.
मुलायम सिंह यादव : अन्ना हजारे की गिरफ्तारी असंवैधानिक है. इस सरकार में थोड़ी भी संवेदनशीलता बची है तो वह अन्ना और उनके साथियों को तत्काल रिहा करे.
नीतीश कुमार : जिस तरह से अन्ना हजारे को हिरासत में लिया गया उससे लगता है कि केंद्र सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का एहसास नहीं है. उन्होंने कहा कि अन्ना की गिरफ्तारी प्रतिरोध को कुचलने की कोशिश है, जो नामुमकिन है. आज जो भी कुछ हो रहा है वह आपातकाल का पूर्वाभ्यास है.
अर्जुन मुंडा : अन्ना हजारे की गिरफ्तारी को लोकतंत्र के लिए खतरनाक और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया.
एन. संतोष हेगड़े : सरकार द्वारा किसी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार के खिलाफ और इसे रोकने के लिए कड़े कदमों से लोगों की आवाज नहीं दबाई जा सकती.
प्रशांत भूषण : अन्ना हजारे को गिरफ्तार किया जाना गैरकानूनी एवं असंवैधानिक है. इस सरकार का लोकतांत्रित मूल्यों में कोई विश्वास नहीं है.
किरण बेदी : दिल्ली पुलिस इस तरह के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को सम्भालने में सक्षम है.. ये गिरफ्तारियां ऊपर के आदेश से ही हुई हैं. इस तरह के हथकंडे आपातकाल के दौरान अपनाए गए थे.
कारोबारी जगत के प्रतिनिधि संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने कहा कि सरकार को कानून बनाने के संसद के अधिकारों की रक्षा और विरोध जताने के आम आदमी के अधिकार की रक्षा के बीच संतुलन बरतनी चाहिए.
फिक्की के अध्यक्ष हर्ष मारीवाला ने कहा, "लोकतंत्र में कानून बनाने और कानून की समीक्षा करने का संसद का अधिकार सर्वोपरि है, लेकिन इसके साथ ही हमारे लोकतंत्र में आम आदमी को अभिव्यक्ति और जन सभा आयोजित करने का भी अधिकार दिया गया है."
इस बीच, समूचा बॉलीवुड भी अन्ना हजारे के समर्थन में उतर आया. जाने-माने गीतकार जावेद अख्तर ने अन्ना को हिरासत में लिए जाने को 'गैरसंवेधानिक' करार दिया है जबकि मशहूर अभिनेता अनुपम खेर ने इस घटना को 'भारतीय गणतंत्र का सबसे दुखद दिन' करार दिया है. इन दोनों के अलावा बॉलीवुड की कई हस्तियों ने पुलिस की इस कार्यवाई की निंदा की है.
अनुपम खेर : अन्ना हजारे, किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल को जेपी पार्क पहुंचने से पहले हिरासत में ले लिया गया. यह भारतीय गणतंत्र के लिए सबसे काला दिन है. हमें सरकार की इस कार्यवाही का विरोध करना है और अपनी बात शांतिपूर्वक कहनी है.
जावेद अख्तर : मैंने अन्ना हजारे के काम करने के तरीके के बारे में कुछ बातें सुनी हैं लेकिन उन्हें हिरासत में लिया जाना असंवैधानिक और अस्वीकार्य है.
शेखर कपूर : हिंसा का कोई खतरा नहीं है लेकिन इसके बावजूद सरकार ने अन्ना हजारे को हिरासत में ले लिया. लाखों लोग आज अन्ना के समर्थन में खड़े हैं क्योंकि उनका तंत्र पर से विश्वास मिट गया है. अगर सरकार लोगों का प्रतिनिधित्व करती है तो उसे अन्ना की टीम को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत देनी चाहिए.
अनुराग कश्यप : कांग्रेस का कामकाज देखकर लग रहा है कि आपातकाल का दौर लौट आया है. यह सरकार काफी कुछ छुपाने की कोशिश कर रही है. पुलिस बल का प्रयोग करके सरकार अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को एक तरह से स्वीकार कर रही है.
शबाना आजमी : हम अन्ना हजारे को हिरासत में लिए जाने का विरोध करते हैं. देश के सभी लोगों को संवेधानिक तौर पर प्रदर्शन का अधिकार है.
देश भर में हुई इन प्रतिक्रियाओं से सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई. सरकार का बचाव करते हुए उसके मंत्रियों ने इस तरह अपने-अपने तर्क रखे.
अम्बिका सोनी : पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में नहीं है. वह स्वतंत्र रूप से काम कर रही है. मैं मानती हूं कि अन्ना के समर्थक हिंसा नहीं करेंगे, लेकिन इस बात की गारंटी कौन दे सकता है कि दो-तीन प्रदर्शनकारी हिंसा नहीं करेंगे और सम्पत्ति को या किसी की जान को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे?
प्रणब मुखर्जी : स्वतंत्र देश में प्रदर्शन का अधिकार हर किसी को है, लेकिन इसका एक तरीका होता है. प्रदर्शन हर व्यक्ति का वैध अधिकार है, लेकिन कुछ नियम और कानून भी है.
पी. चिदम्बरम : संप्रग सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार के खिलाफ नहीं है. लेकिन दुनिया के किसी भी देश में बिना शर्तो के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौती है और इसी आधार पर पुलिस ने फैसला लिया.
कपिल सिब्बल : सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोक नहीं रही. लेकिन यह उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है कि ऐसे प्रदर्शनों का समाज पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े, आम लोगों को किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े और शांति व्यवस्था भंग न हो.
उल्लेखनीय है कि शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और किरन बेदी को एहतियातन मंगलवार सुबह हिरासत में ले लिया गया था. बाद में निजी मुचलका देने व जमानत लेने से इंकार करने पर अन्ना व उनके सहयोगियों को गिरफ्तार कर सात दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया.