अन्ना हजारे पर अपने ही फ़ैसले में फंसती नज़र आ रही है सरकार

भारी दबाव के बाद अन्ना हजारे को रिहा करने का फ़ैसला तो कर लिया गया लेकिन अब सरकार अपने ही फ़ैसले में फंसती नज़र आ रही है.

गांधीवादी नेता अन्ना हजारे को गिरफ़्तार करने के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के आगे यूपीए सरकार झुक चुकी है लेकिन टीम अन्ना को रिहा करने के फ़ैसले ने सरकार को ख़ुद ही फंसा दिया है.

गिरफ़्तारी के लगभग 14 घंटे बाद ही सरकार ने अन्ना हजारे और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ लगाए गए मामलों को वापस लेने का फ़ैसला कर लिया लेकिन अन्ना अब तिहाड़ जेल छोड़ने के मूड में नहीं हैं.

अन्ना हजारे ने उल्टा दाव खेल पलटवार किया है. जेल अधिकारियों ने रिहाई का आदेश मिलने के बाद उन्हें काफी मनाने की कोशिश की लेकिन अन्ना टस से मस नहीं हुए.

उन्होंने जेल से निकलने के लिए शर्तें रख दी हैं. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ और जनलोकपाल विधेयक के समर्थन में आंदोलन कर रहे अन्ना हजारे ने कहा है कि जब तक सरकार उन्हें रिहाई के बाद जेपी पार्क में अनशन की इजाज़त नहीं देगी वह जेल से बाहर नहीं आएंगे.

अन्ना के साथ ही जेल में गए उनके साथी मनीष सिसौदिया जेल से बाहर आ गए हैं. उन्होंने पत्रकारों से कहा है कि अन्ना को जब तक अनशन करने की इजाज़त नहीं मिलेगी वह बाहर नहीं आएंगे.

इस बीच छत्रसाल स्टेडियम में क़ैद कर रखे गए हज़ारों प्रदर्शनकारी भी वहां से टस से मस नहीं हुए हैं और अन्ना की तरह वहीं जमे हुए हैं.

Posted by राजबीर सिंह at 10:19 am.
 

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