राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं को अलग-अलग काम करना चाहिए: दलाई लामा
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तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने बुधवार को कहा कि हमेशा से उनका यह मानना रहा है कि राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं को एक-दूसरे से अलग-अलग काम करना चाहिए. हालांकि उन्होंने दोनों संस्थाओं के लिए अपनी भूमिका निभाई है क्योंकि वह वक्त का तकाजा था.
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चौथे वार्षिक व्याख्यान समारोह को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने कहा, 'अब मुझे यह महसूस होता है कि पिछले कई साल के दौरान मैंने जो भी कहा है मैं उस पर प्रतिबद्ध हूं.' दलाई लामा ने कहा कि मुश्किल दौर में उन्होंने साठ साल तक तिब्बती सरकार के राजनीतिक प्रमुख के रूप में काम किया. अब सही समय है कि इस जिम्मेदारी से मुक्त हुआ जाए.
खुद को 'भारत-पुत्र' कहने वाले दलाई लामा ने देश में जारी भ्रष्टाचार पर भी चिंता जताई और इसे 'शर्मनाक' बताया. दलाई लामा ने कहा, 'यह आलोचना नहीं है बल्कि मैं चिंतित हूं. धार्मिक स्वभाव वाले व्यक्तियों द्वारा (भारतीयों के संदर्भ में) किया गया भ्रष्टाचार वाकई शर्मनाक है. जब मैं चीन में व्यापक भ्रष्टाचार की बात सुनता हूं तो मुझे लगता है कोई बात नहीं क्योंकि वे अविश्वासी हैं.
वे शक्ति और पैसे में विश्वास करते हैं. लेकिन भारत को देखिए. यह देश बहुत हद तक धार्मिक स्वभाव वाले लोगों का देश है. हर भारतीय सुबह प्रार्थना करता है और इसी बीच भ्रष्टाचार भी करता है. मेरा कहना है कि कोई तीसरा रास्ता नहीं है. या तो विश्वासी बनिए और भगवान से डरिए या फिर अविश्वासी बनकर भ्रष्टाचार कीजिए.'