अफजल गुरू को फांसी दी गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे
ताजा खबरें, देश-विदेश 3:16 am
कभी लादेन को शहीद बताने वाले हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी फिर सुर्खियों में आ गए हैं.
हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने चेतावनी दी है कि यदि संसद पर हमला करने वाले मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी दी गई तो इसके परिणाम गंभीर होंगे. गिलानी ने कहा, 'इससे तूफान आ जाएगा.'
गृह मंत्रालय की ओर से संसद पर हमले के मामले में फांसी की सजा पाए अफजल गुरू की दया याचिका राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के पास भेजे जाने के बाद यह मामला फिर से गरमा गया है. मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई है.
गौरतलब है कि अफजल जम्मू कश्मीर के सोपोर का रहने वाला है. इससे पहले दिल्ली सरकार ने कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए अफजल की फांसी की फाइल कई साल तक अटका रखी थी.
हुर्रियत नेता का यह बयान गृह मंत्रालय की ओर से गुरु की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश के बाद आया है.
जहां एक तरफ भारतीय संविधान के तहत अहिंसक आंदोलन होते हैं और लोकतंत्र में आस्था रखी जाती है, वहीं गिलानी खुलेआम भारत का तिरंगा जलाते रहते हैं, कश्मीर में अक्सर आम हड़तालें करवाते हैं.
हुर्रियत काँफ़्रेंस मुख्यत: जम्मू-कश्मीर में चरमपंथी संगठनों से संघर्ष कर रही भारतीय सेना की भूमिका पर सवाल उठाने के अलावा मानवाधिकार की बात करती है. हुर्रियत काँफ़्रेंस भारतीय सेना की कार्रवाई को सरकारी आतंकवाद का नाम देती है और कश्मीर पर भारत के शासन के ख़िलाफ़ हड़ताल और प्रदर्शन करती है.
हुर्रियत काँफ़्रेंस 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस के समारोहों का बहिष्कार भी करती आई है. हुर्रियत काँफ़्रेंस ने अभी तक एक भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लिया है.
अफजल गुरू 2001 में भारतीय संसद पर हूए आतंकवादी हमले का दोषी है. इसे भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने मृत्यु दंड दिया है. अब अफजल गुरू की दया याचिका राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के पास भेजी गई है.
फांसी से कश्मीर में बढ़ेगा तनाव:मीरवाइज
संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की क्षमा याचिका को खारिज करने की गृह मंत्रालय की राष्ट्रपति को सलाह दिए जाने पर अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूख और जेकेएलएफ ने इस सिफारिश को लागू किये जाने पर 'नतीजों' की चेतावनी दी.
जामिया मस्जिद में जुमे की भीड़ को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा, 'अफजल गुरू की क्षमा याचिका पर गृह मंत्रालय की सिफारिशों को जल्दी में लागू करने की जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी.' उन्होंने कहा कि अगर गुरू को फांसी दी गई तो कश्मीर में तनाव बढ़ेगा.
उन्होंने कहा, 'भारत सरकार जम्मू कश्मीर में स्थिति को बेहतर करने के लिए विश्वास बहाली के कदमों की बात करती है. अफगल गुरू को फांसी देने से किस तरह की विश्वास बहाली होगी?'
पडगांवकर के बयान को सरकार ने महत्व नहीं दिया
संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की दया याचिका के मामले में केंद्र सरकार ने कश्मीर पर अपने वार्ताकार दिलीप पडगांवकर के इस बयान को महत्व नहीं दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि वह अफजल को मौत की सजा के पक्ष में नहीं हैं.
इस बारे में पूछे जाने पर गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि पडगांवकर ने उनसे कहा है कि उन्होंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया और भारत सरकार संविधान व कानून का पालन करेगी.
चिदंबरम ने मंत्रिसमूह की मीडिया ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा, 'उन्होंने (पडगांवकर ने) मुझे फोन कर बताया कि उन्होंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया. उनके मुताबिक उनका निजी विचार है कि किसी को भी मौत की सजा नहीं दी जानी चाहिए. वह मौत की सजा के खिलाफ हैं. कई लोग मौत की सजा के खिलाफ हैं. उन्होंने बयान से इनकार किया है. जहां तक मेरी बात है, इसमें कोई मुद्दा नहीं है.'