सीएम रमेश पोखरियाल निशंक के शैक्षणिक प्रमाणपत्र फर्जी !
उत्तराखंड, क्षेत्रीय, ताजा खबरें 4:04 am
उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत ने बुधवार को आरोप लगाया कि निशंक के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में फर्जीवाडे की बात सामने आयी है. इस सिलसिले में मुख्यमंत्री को गत दो अगस्त को एक पत्र लिखा गया, हालांकि उस पत्र का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है.
रावत ने दावा किया कि निशंक ने वर्ष 2007 के विधानसभा चुनावों में अपनी शैक्षणिक योग्यता में हाईस्कूल उत्तीर्ण करने का वर्ष 1977 लिखा, जबकि इंटर उत्तीर्ण करने का कोई वर्ष नहीं लिखा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री (स्नातक) उत्तीर्ण करने की बात लिखी है लेकिन इसमें वर्ष नहीं लिखा है, जिससे संदेह उत्पन्न होता है कि इनकी डिग्रियों में कुछ गड़बड़ जरूर है.
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि निशंक ने स्नातकोत्तर की शिक्षा गढवाल विश्वविद्यालय से ग्रहण करने की बात लिखी है और मानद डाक्ट्रेट उपाधि प्राप्त होने की बात कही है. वर्ष का कहीं भी उल्लेख नहीं है.
उन्होंने जानना चाहा कि क्या मानद डाक्ट्रेट वाला व्यक्ति अपने नाम के आगे 'डाक्टर' लिख सकता है. रावत ने दावा किया कि निशंक की शैक्षणिक योग्यता के बारे में जब सूचना के अधिकार के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी गयी तो गोपनीय विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि यह जानकारी उनके पास उपलब्ध ही नहीं है.
उन्होंने आरोप लगाया कि निशंक ने उत्तर प्रदेश के बरेली पासपोर्ट कार्यालय से अपने पासपोर्ट बनवाने के दौरान अपनी शैक्षणिक योग्यता एमए दिखायी है, लेकिन उसमें भी वर्ष का उल्लेख नहीं है. पूरे देश की जनता इस तथ्य को जानना चाहती है.
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि निशंक की जन्म तिथि में भी भिन्नता है. उन्होने पासपोर्ट कार्यालय तथा आयकर रिटर्न में अपनी जन्म तिथि 15 जुलाई 1959 दिखायी है, जबकि विधानसभा में उनकी जन्म तिथि 15 अगस्त 1958 है और दूसरी ओर मुख्यमंत्री
के वेबसाइट और उनकी पुस्तकों पर यह तिथि 15 अगस्त 1959 है.
रावत ने कहा कि कुछ जगहों पर वर्ष में गड़बड़ी है तो कुछ जगहों पर महीने की तारीख में गड़बड़ है. पूरे देश और प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि यह फर्जीवाडा है या कुछ और है,
दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा गठित राज्य मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष डा. देवेन्द्र भसीन ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से बौखला कर इस तरह की बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.