आखिर धोनी ने इंग्लैंड की बादशाहत स्वीकार कर ही ली!

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आखिर में इंग्लैंड की बादशाहत स्वीकार कर ली.

इंग्लैंड ने भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को तीन मैचों में करारी शिकस्त दी है. और चौथे में देने की तैयारी है.

धोनी ने एजबस्टन में तीसरे मैच में हार के बाद कहा, श्रृंखला वास्तव में हमारे अनुकूल नहीं रही. अधिकतर सत्र में इंग्लैंड हावी रहा. अमूमन हमने हर विभाग में मात खाई. श्रृंखला में अभी तक हम पूरी तरह से हारे हैं.

धोनी को गेंदबाजी से अधिक बल्लेबाजी में कमजोरियां दिखती है. उन्होंने हालांकि माना कि इन दोनों विभागों के अलावा क्षेत्ररक्षण में भी टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा.

उन्होंने कहा, हमारी बल्लेबाजी वैसी नहीं रही जैसी होनी चाहिए थी. हम अच्छा स्कोर नहीं खड़ा कर पाए. गेंदबाजों को लेकर मैं खुश हूं. पहले दो मैच में तीन गेंदबाजों के लिए काम मुश्किल था.

धोनी ने कहा, जब आप दुनिया की चोटी की टीम से खेलते हो तो आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है. हम पर लगातार दबाव बना रहा.

यदि आप एक गेंदबाज की कमी से विरोधी टीम को आउट नहीं कर सकते हो तो आप पर दबाव बढ़ता जाता है. इंग्लैंड की टीम बहुत अच्छी है.

एजबस्टन मैच में बड़े अंतर से हार के बारे में भारतीय कप्तान ने कहा टेस्ट क्रिकेट में कुछ भी हमारे अनुकूल नहीं रहा. हम केवल अपनी क्षमता का 60 से 65 प्रतिशत ही प्रदर्शन कर पाए.

लगातार अच्छी गेंदों को छोड़ना और ढीली गेंदों को सबक सिखाना उच्चस्तर पर अच्छे प्रदर्शन की कुंजी होती है.

धोनी से जब पूछा गया कि हार का अंतर लगातार बढ़ता ही जा रहा है, उन्होंने कहा, हार तो हार होती है. हमें बल्लेबाजी और गेंदबाजी में काफी काम करने की जरूरत है. इंग्लैंड को नंबर एक टीम बनने पर बधाई.

भारतीय कप्तान ने फिर से रैंकिंग के मसले को अधिक तवज्जो नहीं देने की कोशिश की. उन्होंने कहा, मैं हमेशा लगातार अच्छी क्रिकेट खेलने पर जोर देता रहा हूं. नंबर एक बनना बहुत महत्वपूर्ण नहीं है. लेकिन इकाई के तौर पर आपको अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होती है.

यह बिल्ली और चूहे के खेल जैसा है जहां दूसरी टीम आपको पकड़ने की कोशिश करती है. पिछले ढाई साल में हमने यह पहली श्रृंखला गंवाई है.

धोनी ने इस बात को भी दरकिनार कर दिया कि अच्छी तैयारियां नहीं होने से टीम को इतनी बुरी हार झेलनी पड़ी. उन्होंने कहा, मैं वास्तव में कभी ऐसा नहीं सोचता. हमें जो भी अवसर मिले हमने उनका उपयोग करने की कोशिश की.

भारतीय कप्तान ने कहा कि क्रिकेट प्रेमी उनसे प्रत्येक मैच और श्रृंखला जीतने की उम्मीद रखते हैं जो वास्तविकता में संभव नहीं है.

धोनी इसका कारण नहीं बता पाए कि उनकी मशहूर बल्लेबाजी लाइनअप छह पारियों में 300 रन के पार पहुंचने में क्यों नाकाम रही. उन्होंने हालांकि प्रमुख बल्लेबाजों की उम्र को इसका कारण नहीं माना.



उन्होंने कहा, यह बताना मुश्किल है लेकिन मुझे लगता है कि हमें लगातार ढीली गेंदों को सबक सिखाना चाहिए.



जहां तक उम्र का सवाल है तो वे (द्रविड, तेंदुलकर, लक्ष्मण) दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं और उनमें वापसी की क्षमता है.



Posted by राजबीर सिंह at 9:16 pm.
 

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