टीम अन्ना और सरकार के बीच वार्ता विफल, सरकार हुई सख्त
ताजा खबरें, देश-विदेश 11:27 pm
मज़बूत लोकपाल बिल मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के घर पर हुई.
करीब डेढ़ घंटे तक चली बातचीत के बाद इस बैठक को गुरुवार को फिर जारी रखने का फैसला किया गया. यह बैठक गुरुवार दोपहर 12 बजे होगी.
बैठक के बाद टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने पत्रकारों को बताया कि इस बातचीत में सरकार का रवैया सख्त नज़र आया और हम फिर से उसी जगह पहुंच गए जहां से हम चले थे. केजरीवाल ने कहा कि तीन मुद्दों पर मतभेद अभी भी बरकरार है.
प्रगति नहीं होने से नाखुश हजारे के तीनों प्रतिनिधियों अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने कहा कि सरकार के मंगलवार के और बुधवार के रुख को दिन और रात के समान कहा जा सकता है.
केजरीवाल ने कहा कि सरकार बुधवार के अपने वादे से मुकर गई और टीम अन्ना के सदस्यों को डांटती नज़र आई. केजरीवाल ने बताया कि सरकार ने कहा कि अन्ना का अनशन आपकी समस्या है हमारी नहीं.
हजारे पक्ष के सदस्य प्रशांत भूषण ने भी कहा कि हम जहां से चले थे वहीं के वहीं हैं.
पत्रकारों से बातचीत करते हुए किरण बेदी ने कहा कि लोकपाल बिल को लेकर जो फिक्र सरकार ने बुधवार को दिखाई थी वह गुरुवार की बैठक में नहीं दिखाई दी.
बैठक के बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने टीम अन्ना के सदस्यों को सर्वदलीय बैठक के नतीजों से अवगत कराया और उम्मीद जताई कि टीम के सदस्य संसदीय प्रक्रिया को पूरा होने देंगे. मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने उम्मीद की थी कि संसदीय प्रक्रिया को अपना काम करने और जन लोकपाल विधेयक को अपनाने के लिए उसे अनुशंसा करने दी जाएगी. गौरतलब है कि सभी बड़े राजनैतिक दलों ने भी जोर दिया कि संसदीय प्रक्रि या की अनदेखी नहीं की जा सकती.
दूसरी तरफ कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि केबिनेट द्वारा मंजूर सरकारी लोकपाल विधेयक को कम करके नहीं आंका जा सकता.
खुर्शीद ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में जैसा कि सुझाव दिया गया है वैसी ही व्यापक राष्ट्रीय आम सहमति बनाए जाने की जरूरत है और हम उस दिशा में काम कर रहे हैं.
खुर्शीद ने कहा वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है. हमारी प्राथमिकता अन्ना का स्वास्थ्य है और हम ऐसी स्थिति बनाना चाहते हैं कि वे अपना अनशन तोड़ दें.
इससे पहले कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने टीम अन्ना के तीन प्रमुख सदस्यों के साथ जन लोकपाल विधेयक पर चर्चा की और उसके बाद सर्वदलीय बैठक में भी इस मसले पर विचार किया गया. सर्वदलीय बैठक में वामपंथी दलों और भाजपा ने सरकार से अपना लोकपाल विधेयक वापस लेने को कहा, जिसपर संसदीय स्थायी समिति विचार कर रही है.
इन तमाम गतिविधियों के बाद प्रधानमंत्री ने शाम को अपने आवास पर इफ्तार पार्टी की मेज़बानी की, जिसमें लोकपाल का मुद्दा छाया रहा.