खाद्य सब्सिडी के बजाय उर्वरक और पेट्रोलियम क्षेत्र की सब्सिडी में कमी पर ज्यादा ध्यान
ताजा खबरें, व्यापार 11:32 pm
सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में जोरशोर से काम कर रही है.
इससे देश के गरीब परिवारों को सस्ता अनाज देने का कानूनी प्रावधान किया जायेगा. यहां तक कि साधारण परिवारों को भी राशन की दुकानों से सस्ता अनाज देने का कानूनी हक मिलेगा.
माना जा रहा है कि इससे सरकारी खजाने पर सब्सिडी बोझ और बढ़ेगा. हालांकि, योजना आयोग लगातार सब्सिडी बोझ कम करने पर जोर देता रहा है.
आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से खाद्य सब्सिडी बढ़ने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा 'जहां तक सब्सिडी कम करने की बात है उर्वरक, डीजल, मिट्टी तेल और एलपीजी पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी को कम करने की जरुरत है, खाद्य सब्सिडी में कमी लाना इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि इन दूसरी मदों में दी जा रही भारी सब्सिडी पर अंकुश लगाना है.’
अहलूवालिया 12वीं योजना प्रारुप के बारे में जानकारी दे रहे थे.
योजना दस्तावेज पर आयोग की पूर्ण बैठक में विचार होगा. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसकी अध्यक्षता करेंगे. योजना आयोग हमेशा से ही सरकारी सहायता यानी सब्सिडी कम किये जाने पर जोर देता रहा है.
आयोग बिजली क्षेत्र में बिजली बोर्डों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिये बिजली शुल्क लागत के अनुरुप रखने पर जोर देता रहा है.
पेट्रोलियम पदार्थों के दाम भी अंतरर्राष्ट्रीय बाजार के अनुरुप रखने और सब्सिडी केवल जरुरतमंद लोगों तक सीमित रखने पर जोर देता रहा है.
सरकार का सब्सिडी बोझ लगातार बढ़ता गया है. वर्ष 2010-11 में विभिन्न सब्सिडी का बजट अनुमान 116224 करोड़ रुपये रखा गया था लेकिन संशोधित अनुमान में यह तेजी से बढ़कर 164153 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
चालू वित्त वर्ष में सब्सिडी का बजट अनुमान 1,43,570 करोड़ रुपये रखा गया है.
पिछले वित्त वर्ष में ही खाद्य सब्सिडी बिल 27 प्रतिशत बढ़कर 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है.
उर्वरक सब्सिडी 50,000 करोड़ रुपये और पेट्रोलियम सब्सिडी के लिये हालांकि बजट में 24,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है लेकिन वास्तविक सब्सिडी इससे कहीं अधिक है.
इसकी भरपाई के लिये सरकार नकद सहायता देती है जबकि एक तिहाई से अधिक राशि विभिन्न तेल कपंनियां स्वयं वहन करती हैं.