अन्ना हजारे और सरकार में से कोई भी झुकने कों तैयार नहीं

योग गुरु रामदेव से चोट खाई केंद्र की संप्रग सरकार इस बार अन्ना हजारे के 16 अगस्त के अनशन के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं दिख रही है.

जन लोकपाल पर अनशन को लेकर संप्रग सरकार और समाजसेवी अन्ना हजारे के बीच सीधी भिड़ंत का मोर्चा खुल गया है.



दिल्ली पुलिस के सशर्त केवल तीन दिन के लिए अनशन की इजाजत देने के फैसले को अन्ना और उनकी टीम ने खारिज करते हुए 16 अगस्त से जेपी पार्क में निर्बाध आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान कर दिया है. टीम अन्ना दिल्ली पुलिस की शर्तों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय भी जा सकती है.

16 अगस्त को संप्रग व अन्ना की परीक्षा

अन्ना पर कांग्रेस के पलटवार से साफ है कि 16 अगस्त से प्रस्तावित अनशन की जमघट को सीमित रखने की सरकार की पुख्ता तैयारी है. पिछले दिनों अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के अनशन के समय सरकार के नरम रुख की पार्टी में ही कड़ी आलोचना हुई थी.

पहली बार कानून बनाने के लिए अन्ना को शामिल कर संयुक्त समिति बनाने का प्रयोग भी किया गया, जो बुरी तरह असफल रहा. जंतर-मंतर पर अन्ना का अनशन खत्म करवाने की जल्दी में सरकार ने उनकी सारी मांगें मान ली थीं.



शनिवार को कांग्रेस के प्रवक्ता अन्ना के आरोपों और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे गए उनके पत्र पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया था.



कांग्रेस देगा सवालों के जवाब

सरकार की तरफ से अन्ना हजारे के अनशन पर शर्तें लगाने के हजारे के आरोपों पर रविवार को कांग्रेस अपनी प्रतिक्रिया देगी.

कांग्रेस पार्टी ने रविवार 14 अगस्त अपने मुख्यालय पर एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया है, जिसमें हजारे से संबंधित मुद्दों के अलावा कई अन्य मुद्दों पर भी सवालों के जवाब दिए जाएंगे.



इससे पहले कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा है, 'अन्ना के साथी उनकी बलि लेना चाहते हैं. जब अन्ना खुद स्थायी समिति की बैठक के बाद कह चुके हैं कि वे वहां हुई बातचीत से संतुष्ट हैं तो फिर उन्हें फिर से अनशन पर बिठाने का क्या औचित्य है? यह ब्लैकमेल करने जैसा है.'



अल्वी ने कहा कि हजारे पहले ही कानून और न्याय की स्थायी समिति के सदस्यों से मिल चुके हैं. समिति में सभी दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं.



संसदीय राज्य मंत्री हरीश रावत ने कहा कि अन्ना कहते तो खुद को गांधीवादी हैं, मगर उनका तरीका गांधीवादी नहीं है. वे जिस भाषा में बात कर रहे हैं उससे हिंसा और अहंकार की बू आती है.



संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी की गैर-मौजूदगी में सरकार और कांग्रेस के सामने यह पहली बड़ी चुनौती है. सोनिया इन दिनों विदेश में ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं.

Posted by राजबीर सिंह at 11:55 pm.
 

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