फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश

क्राइम ब्रांच ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है.

दबोचे गए आरोपियों की पहचान रेहान खान, जितेन्द्र, निमेश पुर्थी, मार्टिन व आतिफ के रूप में हुई. गिरोह के कब्जे से जामिया यूनिवर्सिटी के खाली सात माइग्रेशन सर्टिफिकेट, बी.ए, बी.कॉम, बी.टेक, एमबीए और सीनियर सेकेण्डरी स्कूल की 30 फर्जी डिग्री व मार्कशीट समेत कई महत्वपूर्ण कागजात बरामद हुए हैं.

इनमें रेहान तथा जितेन्द्र इस गिरोह का सरगना है जबकि निमेश नोएडा के एक ब्रांड रिएल्टी कंपनी में बतौर असिस्टेंट मैनेजर है जबकि मार्टिन दिल्ली में एफएनबी कंसलटेंट व आतिफ गुड़गांव के एक निजी कंपनी में बतौर हेल्प डेस्क सहायक तैनात था.

संयुक्त आयुक्त संदीप गोयल के अनुसार एसीपी एम.सी. कटोच की टीम में शामिल इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार की टीम ने एक गुप्त सूचना पर फरीदाबाद निवासी निमेश पूर्थी (29), नेब सराय निवासी मार्टिन (35) और जामिया नगर, ओखला निवासी आतिफ (27) को तीन अगस्त की देर शाम दबोच लिया. तलाशी में आरोपियों के कब्जे से बीए, बीकॉम, बीएड और 12वीं के चार सर्टिफिकेट मिले. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यह फर्जी डिग्री ओखला निवासी रेहान खान (26) और जितेन्द्र उर्फ साहिल (27) ने तैयार की हैं. इसके बाद क्राइम ब्रांच ने रेहान और जितेन्द्र को उनके घर पर छापा मारकर दबोच लिया. यहां से आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, एक पेन ड्राइव और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल किए जाने वाले कागजात बरामद हुए. पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड रेहान खान और जितेन्द्र उर्फ साहिल हैं और दोनों यह गोरखधंधा करीब दो साल से कर रहे थे.

आरोपियों ने खुलासा किया है कि उन्होंने अब तक 100 से अधिक फर्जी डिग्री/मार्कशीट बनाकर लोगों को दे चुके हैं और इनमें से अधिकांश व्यक्ति दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न प्राईवेट कंपनियो तथा कॉल सेंटर में काम कर रहे हैं. इस गिरोह की यह खासियत थी कि यह उन्हीं लोगो को फर्जी डिग्री तथा अंक पत्र देता था, जिसमें वेरिफिकेशन की कोई गुंजाइश नहीं होती थी. आरोपितो में शामिल जितेन्द्र कुछ माह पहले ही जेल से रिहा हुआ था और वह इस तरह की ठगी में पहले भी जेल जा चुका है.

फर्जी सर्टिफिकेट के लिए ग्राहक की तलाश करना और फर्जी डिग्री तथा अंक पत्र को बेचने का जिम्मा निमेश, मार्टिन और आतिफ का था जबकि फर्जी डिग्री रेहान तथा जितेन्द्र तैयार करते थे. फर्जी डिग्री तथा अंक पत्र तैयार करने के लिए यह गिरोह कागज चावड़ी बाजार से खरीदता था.

Posted by राजबीर सिंह at 8:05 pm.
 

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