महंगाई के खात्मे के लिए सभी को मिलकर लड़ना होगा : प्रणव मुखर्जी
ताजा खबरें, देश-विदेश, राजनीति 5:17 am
संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन (गुरुवार) लोकसभा में प्रणव मुखर्जी ने विपक्ष के उठाए सवालों के जवाब में कहा कि महंगाई पर सरकार गंभीर है.
उन्होंने कहा कि महंगाई मांग और आपूर्ति के अंतर से बढ़ी है न कि विकास दर से. वित्त मंत्री ने लोकसभा में महंगाई के मुद्दे पर जारी बहस के बीच कहा कि ऐसा नहीं कि इससे पहले महंगाई कभी नहीं बढ़ी. लेकिन इसका समाधान किया गया है. उन्होंने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी महंगाई का समाधान किया जाएगा.
वित्त मंत्री ने कहाकि मुद्रास्फीति अधिक है और मैं मानता हूं कि इसे पांच प्रतिशत होना चाहिए, लेकिन यह हमारे नियंत्रण में नहीं है.
उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विकास की दर पांच फीसदी से मामूली अधिक थी जबकि 1990 के दशक में यह छह फीसदी के करीब थी, जो वर्तमान विकास दर आठ से साढ़े साठ फीसदी की तुलना में कम है, लेकिन क्या उस समय महंगाई की दर कम थी? नहीं।
महंगाई के कुछ अहम कारणों पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश में तेल के दामों पर हमारा काबू नहीं हैं. हमारा देश लगभग 75 फीसदी तेल आयात करता है. 2004 में तेल का दाम 36 डॉलर प्रति बैरल था, जो 2011 में बढकर 117 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लगातार तेल महंगा होता जा रहा है जो कि इस देश की महंगाई का बड़ा कारण है.
प्रणब मुखर्जी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे देश की तेल कंपनियां भारी घाटा झेल रही हैं.वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहाकि इस वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का 1.22 लाख करोड़ रुपए का बकाया है.
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहाकि निजी कारों में डीजल के उपयोग पर ‘विलासिता कर’ पर विचार किया जा सकता है. इस संबंध में प्रणाली विकसित करनी होगी
उन्होंने कहा कि महंगाई से निपटने के लिए देश में निवेश के मौकों को बढ़ावा देना होगा.
महंगाई पर प्रणव मुखर्जी ने विपक्ष से सहयोग मांगा और कहा कि महंगाई पर मतभेद खत्म करना होगा और एकजुट होकर इस समस्या से निपटना होगा.
प्रणव के जवाब से असंतोष जताते हुए बसपा और सपा ने लोकसभा से वाकआउट किया.
महंगाई पर वोटिंग
प्रणव मुखर्जी के जवाब के बाद लोकसभा में महंगाई के मुद्दे पर वोटिंग हुई. यशवंत सिन्हा की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव को सदन में 320 सदस्यों ने मंजूर कर लिया जबकि विपक्ष में महज 51 वोट ही पड़े.
मालूम हो कि विपक्ष ने बुधवार को लोकसभा में महंगाई पर नियम-184 के तहत चर्चा के दौरान कहा था कि सरकार महंगाई रोकने में पूरी तरह से असफल है. तरक्की का अर्थ महंगाई है तो ऐसी तरक्की नहीं चाहिए.
विपक्ष ने सरकार की नाकामी की खिंचाई करते हुए कहा था कि सरकार गंभीर नहीं है. आम आदमी परेशान है.
महंगाई की वजह से पांच करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए हैं यानी पांच करोड़ नए गरीब पैदा हो गए हैं.
इससे पूर्व सरकार और विपक्षी दलों के सदस्यों ने बातचीत के बाद तय किया था कि लोकसभा में महंगाई पर नियम-184 के तहत चर्चा होगी, जबकि राज्य सभा में पहले आंतरिक सुरक्षा के नियम के 176 के तहत फिर महंगाई के मुद्दे पर नियम-167 के तहत बहस होगी, जिसमें वोटिंग का प्रावधान है.
उल्लेखनीय है कि 15वीं लोकसभा में चौथी बार महंगाई पर बहस हो रही है जबकि 14वीं लोकसभा में आठ बार महंगाई पर बहस हुई थी.
लोकसभा में महंगाई पर हुई इस बहस में 26 सांसदों ने भाग लिया.