मंत्रियों के अधिकारप्राप्त समूह ने दी पांच लाख टन और चीनी निर्यात की अनुमति

मंत्रियों के अधिकारप्राप्त समूह ने पांच लाख टन और चीनी निर्यात की अनुमति दी.

मंत्रियों के अधिकारप्राप्त समूह (ईजीओएम) ने अधिक उत्पादन अनुमान और घरेलू मांग को पूरा करने के बाद अधिशेष स्टाक को ध्यान में रखते हुए पांच लाख टन और चीनी निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है.

सरकार ने अब तक इस साल ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के तहत दो बराबर की किस्तों में 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है. उच्च पदस्थ सू़त्रों ने कहा, ईजीओएम ने 5,00,000 टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है.

चीनी उद्योग की मांग रही है कि चीनी के भारी अधिशेष स्टाक और उच्च वैश्विक कीमतों को ध्यान में रखते हुए सरकार को और 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देनी चाहिए.

महाराष्ट्र के लगभग सभी राजनीतिक दलों की अधिक निर्यात की मांग रही है ताकि चीनी मिलें गन्ना किसानों को उनके बकाए का भुगतान कर सकें.



खाद्य मंत्री के वी थामस ने कहा था कि चीनी मिलों को चालू 2010-11 के सत्र में 15 मई तक किसानों को 2,591 करोड़ रुपए का भुगतान करना था. इसके अलावा किसानों का इससे पिछले सत्र का भी 211 करोड़ रुपए बकाया है.

चीनी मिलें गन्ना किसानों को चालू सत्र में समय पर भुगतान नहीं कर सकीं क्योंकि चीनी के एक्स मिल कीमतों में गिरावट थी.

चालू चीनी वर्ष 2010-11 के सत्र में चीनी उत्पादन 2.42 करोड टन होने का अनुमान है जो कि पिछले वर्ष 1.88 करोड़ टन था.



चीनी की वार्षिक मांग 2.1 से 2.15 करोड़ टन रहने का अनुमान है.

Posted by राजबीर सिंह at 11:02 pm.
 

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