भट्टा-पारसौल कांड में सात महिलाओं के साथ रेप: अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश, क्षेत्रीय, ताजा खबरें 9:13 pm
अनुसूचित जाति आयोग ने सात पीड़ित महिलाओं के हलफनामे और बयान के आधार पर मामला दर्ज करने को कहा
उत्तर प्रदेश में राजनीति का अखाड़ा बने भट्टा-पारसौल गांव के मामले में नया मोड़ आ गया है. महिला एवं बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ के संसद में दिए बयान के विपरीत अनुसूचित जाति आयोग ने सात पीड़ित महिलाओं के हलफनामे और बयानों के आधार पर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करने के लिए कहा है.
अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने प्रेस को बताया, ‘वहां (भट्टा-पारसौल) की सात महिलाओं ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके साथ बलात्कार हुआ था. आयोग ने नोएडा के एसएसपी को आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज करने के लिए कहा है.
उन्होंने कहा कि आयोग ने 18 अगस्त को इस संबंध में पत्र जारी करके तीन अक्टूबर तक रिपोर्ट मांगी है. इससे पहले कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि इस साल मई में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़पों के दौरान पुलिसकर्मियों ने भट्टा-पारसौल गांव की महिलाओं से बलात्कार किया था लेकिन तीरथ ने संसद में दिए बयान में कहा कि इन गांवों में महिलाओं के साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई.
पुनिया ने कहा, ‘सात महिलाओं ने मई में हलफनामे में बयान दिया था कि उनके साथ बलात्कार हुआ. आयोग ने चिट्ठी भेजकर उन्हें बुलाया था और 17 अगस्त को उन्होंने (महिलाओं ने) पूरी बात बताई और बयान की पुष्टि की कि उनके साथ बलात्कार हुआ था.’
उन्होंने कहा, ‘लता प्रिय कुमार (आयोग सदस्य) यह पूरा मामला संभाल रही हैं. आयोग ने नोएडा एसएसपी से साथ ही कहा है कि इस मामले की जांच महिला पुलिस अधिकारी करे.’
बाराबंकी से सांसद इस कांग्रेसी नेता ने कहा कि पुलिसकर्मियों की पहचान नहीं हुई है लेकिन पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे आरोपियों को पहचान सकती हैं.
उधर, नोएडा के एसएसपी ज्योति नारायण ने एससी आयोग से इस संबंध में पत्र मिलने की पुष्टि की और कहा कि शिकायतकर्ताओं से मिलने और मामले की जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है.
गौरतलब है कि तीरथ ने 12 अगस्त को संसद में एक लिखित जवाब में कहा था, ‘राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा गठित एक जांच समिति ने 12 मई को भट्टा-पारसौल गांव का दौरा किया था और जांच समिति द्वारा बलात्कार के मामले की पुष्टि नहीं हुई.’
यह पूछे जाने पर कि तीरथ ने संसद में भट्टा-पारसौल में बलात्कार की पुष्टि नहीं होने की बात कही है, पुनिया ने कहा, ‘हम नहीं जानते कि उनकी रिपोर्ट में क्या है. हमारे पास जो हलफनामे हैं हम उनके मुताबिक कदम उठा रहे हैं.