अन्ना हजारे के आंदोलन से खादी निर्मित गांधी टोपियों की बिक्री बढ़ी

मजबूत लोकपाल विधेयक के लिए किए जा रहे अन्ना हजारे के आंदोलन से शहर में खादी निर्मित गांधी टोपियों की बिक्री काफी बढ़ गई है.



स्थानीय खादी भंडार के प्रबंधक अिन दवे ने बताया, ‘‘आमतौर पर हम प्रतिदिन 15 से 20 गांधी टोपियां बेचते थे लेकिन पिछले तीन दिनों में हम रोज 150 टोपियां बेच रहे हैं.’’



उन्होंने कहा कि लोग सामान्यत: इन टोपियों को गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय त्योहारों पर खरीदते हैं. इस साल स्वतंत्रता दिवस के बावजूद इन टोपियों की मांग बनी हुई है. :हजारे ने अपना अनशन 16 अगस्त से शुरु किया था.



इन टोपियों की मांग बढ़ने से इनकी कीमत में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. खादी भवन में एक टोपी की कीमत 50 रुपये हैं वहीं फेरीवाले एक टोपी को 100 रुपये में बेच रहे हैं.



हजारे के समर्थन में किए जा रहे प्रदर्शनों और रैलियों में लोगों को गांधी टोपियां पहने हुए आसानी से देखा जा सकता है.



बहरहाल गांधीवादी टोपियों के अधिक कीमत पर बेचे जाने से नाखुश हैं.



गांधीवादी और सौराष्ट्र रचनात्मक समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र देसाई ने कहा कि यह टोपी गांधीजी के विचारों का प्रतीक है और लोगों को इससे पैसा कमाने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए.

Posted by राजबीर सिंह at 7:25 pm.
 

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