बैंकों की सफल ह़डताल के कारण अटका करोडों का लेनदेन
ताजा खबरें, व्यापार 6:30 pm
ह़डताल के कारण जहां देश भर में बैंकिंग कामकाज प्रभावित हुआ, करोडों के चेक अटके रहे वहींकई एटीएम मशीनों में नकदी समाप्त हो जाने के कारण ग्राहकों की परेशानी और बढ़ गई।
बैंक कर्मचारी संघों के संयुक्त फोरम के संयोजक सीएच वेंकटचलाम ने चेन्नई में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अलावा निजी और विदेशी बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारी ह़डताल में शामिल हुए। चेक क्लियरिंग कामकाज भी प्रभावित हुआ है।
उन्होंने हालांकि कहा कि कुछ निजी बैंक हालांकि काम करते रहे। बताया गया कि आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक हउताल में शामिल नहीं थे। अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ के हरविंदर सिंह ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी कम की जा रही है और साथ ही हमारे बैंकों में निजी पूंजी बढ़ रही है। हमारी मांग है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण नहीं होना चाहिए और इन बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी कम नहीं होनी चाहिए।
सार्वजनिक बैंकों की पूंजी बढ़ाने के लिए विश्व बैंक से ऋण भी नहीं लिया जाना चाहिए। अन्य मांगों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का विलय रोकना, स्थाई बैंकिंग नौकरियों का निजी बैंकों से आउटसोर्सिग रोकना, खाली पदों को भरना, मुआवजे के आधार पर पारिवार के सदस्य को नौकरी और आवास, कार और अन्य ऋणों के लिए दिशा-निर्देश तय करना शामिल है।
ह़डताल का सभी राज्यों में असर दिखा। कर्नाटक के बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप्प रहा। उत्तर प्रदेश की करीब 6,000 शाखाओं के लगभग एक लाख कर्मचारी शामिल हुए। मध्य प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर बैंककर्मियों ने जगह-जगह सभाएं कीं। नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के द्वारा जारी किए गए एक बयान के मुताबिक कर्मचारी संघों ने अपनी मांगों के साथ ह़डताल की सूचना दो माह पहले दे दी थी, लेकिन सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया।
सरकार ने तीन अगस्त को इस पर थो़डी पहल की, लेकिन वार्ता को कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाने के कारण यूएफबीयू ने ह़डताल की घोषणा कर दी। संघ के अधिकारियों का कहना है कि वे 10 अगस्त को बेंगलुरू में बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार करेंगे।