दुनियाभर की ऊर्जा कंपनियों की नजर लीबिया के अकूत तेल भंडारों पर

मुअम्मर गद्दाफी का 42 साल का शासन खत्म होने के करीब होने के साथ ही दुनियाभर की ऊर्जा कंपनियों की नजर अब लीबिया के अकूत तेल भंडारों पर है.

अफ्रीका में लीबिया के पास जितना तेल भंडार है, उतना किसी भी अफ्रीकी देश के पास नहीं है.लीबिया के पास 40 अरब बैरल से अधिक का तेल भंडार यानी 'काला सोना’ है.

मीडिया रपटों के मुताबिक, जैसे ही लीबियाई विद्रोही सरकार बनाने के लिए योजनाएं तैयार करना शुरू करते हैं, तेल एवं गैस उनके एजेंडा में सबसे ऊपर होगा.

पुनर्निर्माण के लिए एक लीबियाई विद्रोही अहमद जेहानी ने संकेत दिया कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो वैश्विक कंपनियों के साथ सभी मौजूदा अनुबंधों का सम्मान किया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि फरवरी में जब क्रांति शुरू हुई, बीपी सहित सभी तेल कंपनियों ने लीबिया छोड़ दिया. बीपी लीबिया के पश्चिम में घदम्स ब्लॉक में अपना पहला उत्खनन शुरू करने ही वाली थी.

लैंबर्ट एनर्जी एडवाइजरी के विशेषज्ञ फिलिप लैंबर्ट ने कहा, 'लीबिया में अब भी अरबों बैरल तेल मौजूद है. लीबिया यूरोप के लिए अफ्रीका का द्वार है और वहां भारी संभावनाएं हैं. विश्व को और तेल की जरूरत है.’

Posted by राजबीर सिंह at 11:10 pm.
 

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