दंगों की प्रकृति समझ नहीं पाई लन्दन पुलिस
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इस बीच, प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि पुलिस ने यह माना है कि वह दंगों की प्रकृति समझ नहीं पाई और इससे निपटने के लिए उसने जो रणनीतियां अपनाईं वह कारगर साबित नहीं हुईं.
कैमरन ने कहा कि हिंसा के लिए अब तक 1300 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें दुकानों से समान लूटने वाले और भवनों को आग के हवाले करने वाले शामिल हैं. वहीं, गृह मामलों की समिति के अध्यक्ष कीथ वाज ने कहा कि सभी सदस्य दंगों के कारणों की जांच कराए जाने पर सहमत हैं.
हाउस आफ कामंस को सम्बोधित करते हुए कैमरन ने हिंसा के दौरान कई शहरों में हुई क्षति की भरपाई के लिए एक करोड़ पाउंड के राहत पैकेज की घोषणा की.
प्रधानमंत्री ने कहा, "लोगों को सुरक्षित रखना सरकार की पहली प्राथमिकता है."
उन्होंने स्वीकार किया कि जब हिंसा फैली उस समय सड़कों पर पुलिस की तैनाती 'काफी कम थी' और पुलिस ने दंगे रोकने के लिए जो रणनीति अपनाई उसने काम नहीं किया.
कैमरन ने कहा कि पुलिस यह मान चुकी है कि उसने दंगे रोकने के लिए गलत रणनीति अपनाई.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार से भड़के दंगों के बाद से अब तक 1300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
प्रधानमंत्री ने सांसदों को बताया, "पुलिस प्रमुखों ने दंगे के बारे में मुझसे खुलकर बात की. पुलिस को शुरुआत में लगा कि लोगों का गुस्सा भड़कने का यह सामान्य समस्या है जबकि यह मामला आपराधिक था."
उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि पुलिस एक नए तरीके की विचित्र चुनौती का सामना कर रही थी. अलग-अलग तरह के लोग एक ही समय में सभी स्थानों पर एक ही काम लूटपाट करने में लगे थे."
प्रधानमंत्री ने बताया कि पुलिस जब दंगाइयों से निपट रही थी उसी समय लंदन में निगरानी दस्ते के साथ उसकी भिड़ंत हो गई. यह झड़प तब हुई जब निगरानी दस्ता हालात से निपटने के लिए अपने सदस्यों को एकजुट कर रहा था.
वहीं, वाज ने कहा कि जांच में पुलिस की कार्रवाई, दंगों से निपटने के सरकारी संसाधनों और सोशल नेटवर्किं ग वेबसाइट की भूमिका भी शामिल की जाएगी. जबकि उप प्रधानमंत्री निक क्लेग ने कहा कि सरकार का पहला काम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
बीबीसी के मुताबिक क्लेग ने कहा, "हमारी मूल जरूरत है कि हम ये जानें कि हमारे घर, दुकानें और लोग सुरक्षित हैं."
समाचार पत्र 'टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार रात निगरानी दस्ते ने पुलिस के आदेशों का उल्लंघन किया और अधिकारियों के खिलाफ अपना गुस्सा उतारा.
दक्षिण-पूर्वी लंदन के इलथम में दंगा शांत कर रहे 1,000 से अधिक पुलिस कर्मियों पर बोतलों से हमला किया गया. दंगाइयों से निपटने के लिए देशभर में निगरानी दस्ते भी तैनात किए गए हैं.
उल्लेखनीय है कि गत चार अगस्त को पुलिस की गोलाबारी में मार्क डग्गन नाम के व्यक्ति के मारे जाने के बाद छह अगस्त को टॉटनहम में हिंसा शुरू हुई. इसके बाद हिंसा शीघ्र ही अन्य शहरों मैनचेस्टर, सैलफर्ड, लिवरपुल, नॉटिंघम, लीसेस्टर और बर्मिघम में फैल गई. इस दौरान दंगाइयों ने दुकानों में लूटपाट की और इमारतों में आग लगाई.